कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने प्रवक्ता Vijeta Dahiya को पद से हटा दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और पार्टी के भीतर हुए घटनाक्रमों को देखें तो इस पूरे विवाद की शुरुआत एक बर्गर से होती जरूर दिखाई देती है, लेकिन कहानी सिर्फ बर्गर तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी उठे कि आंदोलन का नेतृत्व करने वाला चेहरा उस वक्त कहां था, जब प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे थे, और बाद में उसने उठे सवालों का जवाब किस अंदाज में दिया।
जंतर-मंतर से संसद मार्च और शुरू हुआ विवाद
20 जुलाई को CJP के आह्वान पर हजारों छात्र और युवा जंतर-मंतर से संसद तक मार्च के लिए निकले थे। मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज और झड़पों को लेकर कई मीडिया संस्थानों की रिपोर्टें सामने आईं। सोशल मीडिया पर वायरल सैकड़ों वीडियो और तस्वीरों में प्रदर्शनकारियों के घायल होने के दावे भी किए गए। इसी दौरान कुछ वीडियो सामने आए, जिनमें दावा किया गया कि CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता Vijeta Dahiya प्रदर्शन स्थल पर मौजूद नहीं थे।
वायरल वीडियो के अनुसार वह कनॉट प्लेस के पास एक फूड आउटलेट पर बर्गर खाते दिखाई दिए। वीडियो बनाने वाले युवक ने उनसे सवाल किया, “जब हजारों छात्र जंतर-मंतर और संसद मार्च में हैं, तब आप यहां क्या कर रहे हैं? लोगों को आंदोलन में बुलाकर खुद बर्गर खा रहे हैं?” यह वीडियो कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और आंदोलन के समर्थकों के बीच भी सवाल उठने लगे।

देर रात मॉल में भी हुआ विवाद
विवाद यहीं नहीं रुका। उसी रात एक मॉल के भीतर का एक और वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कुछ लोग विजेता दहिया से तीखी बहस करते और धक्का-मुक्की करते दिखाई दिए। वीडियो में लोग उन्हें अपशब्द कहते हुए आरोप लगा रहे थे कि छात्र सड़कों पर पुलिस कार्रवाई झेल रहे हैं, जबकि आंदोलन का चेहरा आराम से घूम रहा है। वीडियो बनाने वाला युवक कहता सुनाई देता है, “तुम इस लायक नहीं हो कि तुम्हें लिमलाइट मिले। छात्रों ने मार खाई और तुम यहां घूम रहे हो। रात के बारह बज रहे हैं, तुम यहां क्या कर रहे हो?” इन वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस को और तेज कर दिया।
बर्गर नहीं, जवाब देने का अंदाज बना बड़ा मुद्दा
वीडियो वायरल होने के बाद विजेता दहिया ने खुद कैमरे के सामने आकर सफाई दी। उनके हाथ में बर्गर था और उन्होंने कहा कि “आदमी बर्गर तभी खाता है जब उसे भूख लगी हो या उसका मन हो।” उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी के प्रति जवाबदेह नहीं हैं और जो कुछ कर रहे हैं, अपनी इच्छा और देश के लिए कर रहे हैं। यहीं से विवाद ने नया मोड़ लिया। कई लोगों का मानना था कि असली मुद्दा बर्गर खाना नहीं, बल्कि आंदोलन से जुड़े गंभीर सवालों पर उनका जवाब देने का तरीका था। आलोचकों ने कहा कि जब हजारों छात्र आंदोलन में चोट खा रहे हों, तब आंदोलन के प्रमुख चेहरे को अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी।

CJP में कैसे हुई थी एंट्री?
विजेता दहिया CJP के शुरुआती प्रमुख चेहरों में शामिल थे। 3 और 4 जून के बीच पार्टी ने तीन राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किए थे—सौरभ दास, विजेता दहिया और आशुतोष रांका। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस से ही विजेता दहिया लगातार पार्टी की ओर से मीडिया के सामने आते रहे। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, NEET, पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लगभग हर बड़े मुद्दे पर उन्होंने पार्टी का पक्ष रखा। कुछ ही दिनों में वह CJP के सबसे पहचान वाले प्रवक्ताओं में गिने जाने लगे।
भाषणों से ज्यादा डांस वाले वीडियो हुए वायरल
हालांकि समय के साथ उनकी पहचान उनके भाषणों से ज्यादा सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले डांस वीडियो से बनने लगी। उन्होंने खुद को “दुनिया का पहला Dancing Activist” बताते हुए कहा था कि उनका डांस मनोरंजन नहीं बल्कि विरोध दर्ज कराने का एक तरीका है। इसके बाद जंतर-मंतर के मंच से उनके डांस के कई वीडियो सामने आए। कभी वह “सड्डा हक”, कभी “चक दे इंडिया”, तो कभी “आजादी रैप” पर नाचते दिखाई दिए।

एक वीडियो में तो वह प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी डांस करते नजर आए। वहीं सोनम वांगचुक के अनशन स्थल से भी उनके डांस के वीडियो वायरल हुए। इन वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। एक यूजर ने लिखा, “एक तरफ आप कहते हैं कि पेपर लीक से छात्रों ने आत्महत्या की, दूसरी तरफ उसी आंदोलन में हंसते हुए नाच रहे हैं।” दूसरे ने टिप्पणी की, “मैं इस आंदोलन का समर्थक था, लेकिन ऐसा लग रहा है कि यह व्यक्ति छात्रों की पीड़ा से ज्यादा खुद की लोकप्रियता में दिलचस्पी रखता है।”
कौन हैं Vijeta Dahiya?
विजेता दहिया मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं। वह दिल्ली और मुंबई में भी रह चुके हैं। उन्होंने Delhi Technological University (DTU) से पढ़ाई की है। CJP ने उनका परिचय एक राजनीतिक शोधकर्ता, लेखक और फिल्मकार के रूप में कराया था। उन्होंने कई YouTube क्रिएटर्स के लिए रिसर्च का काम किया है, किताबें लिखी हैं और हरियाणवी फिल्मों में लेखक एवं निर्देशक के तौर पर भी काम किया है। यानी उनका पेशेवर अनुभव काफी व्यापक रहा है। लेकिन सोशल मीडिया पर धीरे-धीरे उनकी पहचान उनके शोध या भाषणों से अधिक डांस वाले वीडियो और हालिया बर्गर विवाद से जुड़ती चली गई।
स्वानंद किरकिरे की टिप्पणी भी हुई वायरल
बर्गर विवाद के बाद प्रसिद्ध गीतकार और गायक स्वानंद किरकिरे ने भी X पर विजेता दहिया का वीडियो साझा करते हुए लिखा, “नौकरी नहीं, जिम्मेदारी है Protest.” यह टिप्पणी भी सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गई और आंदोलन में नेतृत्व की जिम्मेदारी बनाम व्यक्तिगत व्यवहार पर नई बहस शुरू हो गई।

सिर्फ 48 दिन में खत्म हुआ प्रवक्ता का सफर
3 जून को राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाए गए विजेता दहिया का CJP में सफर करीब 48 दिनों में समाप्त हो गया। पार्टी ने उन्हें पद से हटा दिया। लेकिन क्या यह फैसला सिर्फ एक बर्गर की वजह से हुआ? या फिर कई दिनों से बन रही उस छवि का परिणाम था, जिसमें आंदोलन के मंच से डांस, सोशल मीडिया विवाद, वायरल वीडियो और फिर बर्गर प्रकरण एक के बाद एक जुड़ते चले गए?
विजेता दहिया ने क्या कहा?
इन सभी घटनाक्रमों के बाद हमने विजेता दहिया से बातचीत कर उनका पक्ष भी जानने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि उन्हें पार्टी से हटाए जाने की जानकारी अचानक फोन कॉल के जरिए मिली।
दहिया के अनुसार, “मुझे अभिजीत का अचानक फोन आया। मुझे लगा वह पूछेंगे कि मैं ठीक हूं या जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, उनके बारे में बात करेंगे। लेकिन उन्होंने सीधे कहा—’विजेता, मत आओ… अब आपकी जरूरत नहीं है।’ यह मेरे लिए काफी चौंकाने वाला था।” उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ चल रहा अभियान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश का हिस्सा था।

“मैंने अभिजीत से कहा कि जो लोग आंदोलन को बदनाम करना चाहते हैं, वे पिछले एक महीने से यही कर रहे हैं। उन्होंने तुम्हारी भी कचौड़ी खाते हुए तस्वीरें चलाई थीं। मैंने हर प्रोपेगेंडा को डिबंक किया, फिर हम उन्हीं लोगों के दबाव में क्यों झुक रहे हैं?”
दहिया के मुताबिक, पार्टी ने उनसे इस्तीफा देने को कहा, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। “मैंने कहा कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगा। अगर आपको लगता है कि मुझे हटाना चाहिए, तो आप ही मुझे निकाल दीजिए। इसके बाद पार्टी ने वही किया।” विजेता दहिया का कहना है कि उन्होंने स्वेच्छा से पद नहीं छोड़ा, बल्कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें हटाने का फैसला लिया।